21 वर्षों से छात्रों की प्रतिभा को मंच दे रहे हैं केरल के कला शिक्षक, वार्षिक प्रदर्शनी बनी प्रेरणा का स्रोत
तिरुवनंतपुरम: शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होती, बल्कि छात्रों की रचनात्मकता और प्रतिभा को पहचानना भी उसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। केरल के एक कला शिक्षक ने इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए पिछले 21 वर्षों से अपने छात्रों की कलाकृतियों को प्रदर्शित करने की अनूठी परंपरा कायम रखी है। उनकी यह पहल न केवल छात्रों को अपनी कला दिखाने का अवसर देती है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और नई पहचान भी प्रदान करती है।
कला शिक्षक द्वारा आयोजित वार्षिक प्रदर्शनी में हर वर्ष छात्र अपनी पेंटिंग, स्केच, हस्तशिल्प और अन्य रचनात्मक कार्यों को प्रदर्शित करते हैं। इस मंच के माध्यम से कई छात्रों को अपनी प्रतिभा निखारने और कला के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।
शिक्षक का मानना है कि कला बच्चों की कल्पनाशक्ति को विकसित करने के साथ-साथ उन्हें अपने विचार व्यक्त करने का अवसर भी देती है। इसी उद्देश्य से उन्होंने दो दशक से अधिक समय पहले इस प्रदर्शनी की शुरुआत की थी। समय के साथ यह आयोजन स्थानीय स्तर पर काफी लोकप्रिय हो गया और अब इसे समुदाय का भी भरपूर समर्थन मिल रहा है।
प्रदर्शनी में शामिल होने वाले छात्रों का कहना है कि उनकी कलाकृतियों को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित होते देख उन्हें गर्व महसूस होता है। इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और वे अपनी रचनात्मक क्षमताओं को और बेहतर बनाने के लिए प्रेरित होते हैं।
21 वर्षों की इस यात्रा में हजारों छात्र इस पहल का हिस्सा बन चुके हैं। कई पूर्व छात्र आज कला, डिजाइन और रचनात्मक क्षेत्रों में सफल करियर बना रहे हैं। उनके अनुसार, स्कूल के दिनों में मिली यह पहचान और प्रोत्साहन उनके जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुका है।
शिक्षा और कला के समन्वय का यह उदाहरण दिखाता है कि एक समर्पित शिक्षक किस तरह छात्रों के भविष्य को नई दिशा दे सकता है। यह पहल केवल कला प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि युवाओं के सपनों को उड़ान देने का माध्यम भी बन चुकी है।


