अमरवाड़ा की ग्राम पंचायत (मंदनगढ़) में सचिव मोहन सरपंच दिनेश ने किया लाखों रुपए का भ्रष्टाचार
अमरवाड़ा की जपनद ग्राम पंचायत मंदनगढ़ इन दिनों सुर्खियों में बना हुआ हैं । मदनगढ़ क्षेत्र से लगातार भ्रष्टाचार की शिकायत सामने आने आ रही है।ग्राम पंचायत में हर साल पाइपलाइन के नाम पर लाखों रूपये निकाले जा रहे है और ग्राम पंचायत के पंच ने इसकी शिकायत भी की फिर भी जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई भी संज्ञान नहीं लिया जा रहा हैं। इससे ये पता चलता हैं कि जनपद पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी इस मामले में कोई भी कार्यवाही नहीं करना चाहते हैं।
ग्राम पंचायत मंदनगढ़ में भ्रष्टाचार को खुला संरक्षण मिल रहा है। जनपद पंचायत अमरवाड़ा इन दिनों पंचायतों में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर सुर्खियों में है। ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों, निर्माण कार्यों और शासकीय योजनाओं में अनियमितताओं की लगातार शिकायतें सामने आने के बावजूद भी कार्रवाई नहीं होने से व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जयदेव शर्मा की कार्यशैली को लेकर हो रही है। चर्चा है कि पंचायतों में सरपंच और सचिव खुलकर मनमानी कर रहे हैं, लेकिन जनपद पंचायत स्तर पर उन पर कोई सख्त कदम नहीं उठाया जा रहा। शिकायतें फाइलों में दबकर रह जाती हैं और कार्रवाई केवल कागजों तक ही सीमित दिखाई देती है। हालात ऐसे बन गए हैं मानो पंचायत प्रतिनिधियों को भ्रष्टाचार करने की खुली छूट मिल गई हो।
जब जयदेव शर्मा का स्थानांतरण जनपद पंचायत सेंवढ़ा से अमरवाड़ा में हुआ था, तब उनकी कार्यशैली को लेकर काफी चर्चाएं थीं। शुरुआती समय में उन्होंने सख्ती दिखाई, कई मामलों में सक्रियता नजर आई और प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर वे मीडिया की सुर्खियों में भी रहे। लेकिन समय बीतने के साथ वही सख्ती अब दिखाई नहीं दे रही। करीब एक वर्ष के कार्यकाल में पंचायतों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की शिकायतें लगातार बढ़ती गईं, मगर जिम्मेदारों द्वारा कार्रवाई न होने से पूरे प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है।पंचायतों में हो रहे कथित भ्रष्टाचार को लेकर अब यह चर्चा तेज हो गई है।
आखिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?
जिम्मेदारों पर प्रशासन इतना मेहरबान क्यों नजर आ रहा है?
जनपद पंचायत अमरवाड़ा की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहे सवाल अब केवल पंचायतों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि पूरे क्षेत्र में यह मुद्दा चर्चा का विषय बनता जा रहा है। पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही की बात करने वाला प्रशासन अब खुद कटघरे में खड़ा दिखाई दे रहा है।


